अपमान करना है। भारतवर्ष में यदि कोई पुरोहित द्रव्य-प्राप्ति के लिए धर्म का उपदेश करे तो वह जाति से च्युत कर दिया जाएगा और लोग उस पर थूकेंगे। मैं यहां पर अपने दरिद्र भाइयों के निमित्त सहायता मांगने आया था, पर मैं पूरी तरह समझ गया हूं कि मूर्तिपूजकों के लिए ईसाइधर्मावलम्बियों से और विशेषकर उन्हीं के देश में, सहायता प्राप्त करना कितना कठिन है।’’
97 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
ड्यूक, आइवा, टाइम्स ने 29 सितम्बर को लिखा था:
अपमान करना है। भारतवर्ष में यदि कोई पुरोहित द्रव्य-प्राप्ति के लिए धर्म का उपदेश करे तो वह जाति से च्युत कर दिया जाएगा और लोग उस पर थूकेंगे। मैं यहां पर अपने दरिद्र भाइयों के निमित्त सहायता मांगने आया था, पर मैं पूरी तरह समझ गया हूं कि मूर्तिपूजकों के लिए ईसाइधर्मावलम्बियों से और विशेषकर उन्हीं के देश में, सहायता प्राप्त करना कितना कठिन है।’’
97 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
ड्यूक, आइवा, टाइम्स ने 29 सितम्बर को लिखा था: