कि इस विज्ञ राष्ट्र को धर्मोपदेशक भेजना कितनी मूर्खता है। ‘हेरल्ड’ (यहां का सबसे बड़ा समाचार पत्र।)।
‘‘इतना उद्वत करके अब मैं समाप्त करता हूं नहीं तो आप मुझे घमंडी समझ बैठेंगे। परन्तु आपके लिए इतना आवश्यक था, क्योंकि आप प्रायःकूप‘मंडूक बने है और दूसरे स्ािानों में संसार किस गति से चल रहा है, यह देखना भी नहीं चाहते। मेरे उदार मित्र! मेरा मतलब आपसे व्यक्तिशः नहीं है, सामान्य रूप से हमारे सम्पूर्ण
99 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
कि इस विज्ञ राष्ट्र को धर्मोपदेशक भेजना कितनी मूर्खता है। ‘हेरल्ड’ (यहां का सबसे बड़ा समाचार पत्र।)।
‘‘इतना उद्वत करके अब मैं समाप्त करता हूं नहीं तो आप मुझे घमंडी समझ बैठेंगे। परन्तु आपके लिए इतना आवश्यक था, क्योंकि आप प्रायःकूप‘मंडूक बने है और दूसरे स्ािानों में संसार किस गति से चल रहा है, यह देखना भी नहीं चाहते। मेरे उदार मित्र! मेरा मतलब आपसे व्यक्तिशः नहीं है, सामान्य रूप से हमारे सम्पूर्ण
99 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द