तेजस्वी मुखमंडल तथा उनकी गम्भीर सुललित वाणी ने सबको अनायसा अपने वश में कर लिया है।... बिना किसी प्रकार के नोट्स की सहायता ही के वे भाषण देते हैं, अपने तथ्य तथा निष्कर्ष को वे अपूर्व ढंग से एवं आन्तरिकता के साथ सम्मुख रखते हैं और उनकी स्वतः स्फूर्त प्रेरणा उनके भाषण को कई बार अपूर्व वाक्पटुता से युक्त कर देती है। (वही)।
‘‘विवेकानन्द निश्चय ही धर्म-महासभा में महानतम व्यक्ति हैं। उनका भाषण सुनने के बाद यह मालूम होता है
तेजस्वी मुखमंडल तथा उनकी गम्भीर सुललित वाणी ने सबको अनायसा अपने वश में कर लिया है।... बिना किसी प्रकार के नोट्स की सहायता ही के वे भाषण देते हैं, अपने तथ्य तथा निष्कर्ष को वे अपूर्व ढंग से एवं आन्तरिकता के साथ सम्मुख रखते हैं और उनकी स्वतः स्फूर्त प्रेरणा उनके भाषण को कई बार अपूर्व वाक्पटुता से युक्त कर देती है। (वही)।
‘‘विवेकानन्द निश्चय ही धर्म-महासभा में महानतम व्यक्ति हैं। उनका भाषण सुनने के बाद यह मालूम होता है