उन्होंने इसे सुनहरा अवसर जाना और कम्पनी के साथ व्याख्यान देने का अनुबंध कर लिया।
इस योजना के अंतर्गत अमेरिका के सभी राज्यों के बड़े-बड़े शहरों में विवेकानन्द के भाषण होने लगे। जहां कहीं वे जाते थे, वहीं उनका आदर-सत्कार होता था, कौतुहल-प्रिय दर्शकों की भीड़ लग जाती थी और भारी टिकट के बावजुद व्याख्यान-भवन श्रोताओं से खचाखच भर जाते थे। विवेकानन्द दोहरी तलवार थे। एक तरफ वे अपने धर्म की उदार व्याख्या करके मुनष्य मात्र की एकता
उन्होंने इसे सुनहरा अवसर जाना और कम्पनी के साथ व्याख्यान देने का अनुबंध कर लिया।
इस योजना के अंतर्गत अमेरिका के सभी राज्यों के बड़े-बड़े शहरों में विवेकानन्द के भाषण होने लगे। जहां कहीं वे जाते थे, वहीं उनका आदर-सत्कार होता था, कौतुहल-प्रिय दर्शकों की भीड़ लग जाती थी और भारी टिकट के बावजुद व्याख्यान-भवन श्रोताओं से खचाखच भर जाते थे। विवेकानन्द दोहरी तलवार थे। एक तरफ वे अपने धर्म की उदार व्याख्या करके मुनष्य मात्र की एकता