का संदेश देते और उसकी तुलना में ईसाई धर्म की हीनता और संकीर्णता को उजागर कर देते थे। दूसरी तरफ मिशनरियों के भारत-संबंधी मूर्खतापूर्ण प्रचार और धूर्तता का भंडाफोड़ करने से भी बाज नहीं आते थे।
लेकिन अब उन्हें दो प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। एक यह कि अमेरिकन नगरों का वातावरण भिन्न-भिन्न था, धर्म-महासभा का वातावरण कहीं न था और श्रोताओं के प्रायः ऐसे स्ािूल बुद्वि तथा अंधविश्वासी लोग अधिक होते थे, जो हुल्लड़बाजी
का संदेश देते और उसकी तुलना में ईसाई धर्म की हीनता और संकीर्णता को उजागर कर देते थे। दूसरी तरफ मिशनरियों के भारत-संबंधी मूर्खतापूर्ण प्रचार और धूर्तता का भंडाफोड़ करने से भी बाज नहीं आते थे।
लेकिन अब उन्हें दो प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। एक यह कि अमेरिकन नगरों का वातावरण भिन्न-भिन्न था, धर्म-महासभा का वातावरण कहीं न था और श्रोताओं के प्रायः ऐसे स्ािूल बुद्वि तथा अंधविश्वासी लोग अधिक होते थे, जो हुल्लड़बाजी