कुछ मालूम नहीं और वे इसे ‘नील नाक वाले प्रेस बटेरियनों’ की पत्रिका कहते हैं। यह बहुत ही कट्टर संप्रदाय है। किन्तु यह ‘नील नाक वाले’ सभी लोग दुर्जन हैं, ऐसी बात नहीं है। अमेरिकी निवासीगण और बहुत से पादरीगण मेरा बहुत आदर करते हैं। जिनका सम्मान कर लोग आदर कर रहे हैं,उस पर कीचड़ उछालकर प्रसिद्वि प्राप्त करने के इरादे ही से इस पत्र ने ऐसा लिखा है। ऐसे छल को यहां के लोग खूब समझते हैं एवं यहां
101 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
कुछ मालूम नहीं और वे इसे ‘नील नाक वाले प्रेस बटेरियनों’ की पत्रिका कहते हैं। यह बहुत ही कट्टर संप्रदाय है। किन्तु यह ‘नील नाक वाले’ सभी लोग दुर्जन हैं, ऐसी बात नहीं है। अमेरिकी निवासीगण और बहुत से पादरीगण मेरा बहुत आदर करते हैं। जिनका सम्मान कर लोग आदर कर रहे हैं,उस पर कीचड़ उछालकर प्रसिद्वि प्राप्त करने के इरादे ही से इस पत्र ने ऐसा लिखा है। ऐसे छल को यहां के लोग खूब समझते हैं एवं यहां
101 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द