साधन कहीं क्षीण न हो जाएं। किन्तु इनके प्रधान पादरियों में से एक भी मेरा विरोधी नहीं है। खैर, जो भी हो, जब तालाब में उतरा हूं, अच्छी तरह से स्नान करूंगा।’’ (वि.सा., द्वितीय खंड, पृष्ठ 320)
हिन्दू कट्टर-पंथियों के लिए उन्होंने एक दूसरे पत्र में लिखा था कि अगर उन्हंे धर्म की इतनी चिन्ता है, तो भारत से एक रसोइया और खाने की सामग्री क्यांे नहीं भेज देते? जब वे गांठ से एक पैसा खर्च करने को तैयार नहीं तो व्यर्थ की बातें बनाने
साधन कहीं क्षीण न हो जाएं। किन्तु इनके प्रधान पादरियों में से एक भी मेरा विरोधी नहीं है। खैर, जो भी हो, जब तालाब में उतरा हूं, अच्छी तरह से स्नान करूंगा।’’ (वि.सा., द्वितीय खंड, पृष्ठ 320)
हिन्दू कट्टर-पंथियों के लिए उन्होंने एक दूसरे पत्र में लिखा था कि अगर उन्हंे धर्म की इतनी चिन्ता है, तो भारत से एक रसोइया और खाने की सामग्री क्यांे नहीं भेज देते? जब वे गांठ से एक पैसा खर्च करने को तैयार नहीं तो व्यर्थ की बातें बनाने