‘‘इस सभा को जितना बड़ा बना सकते हो, बनाओ। धर्म एवं देश के नाम पर सभी बड़े आदमियों को उसमें भाग लेने के लिए पकड़ो। मैसूर के महाराजा तथा दीवान से इस सभा और उसके उद्देश्यों का समर्थन करने वाला पत्र प्राप्त करने की चेष्टा करो। मतलब यह कि जितनी बड़ी सभा और उसका शोर उठा सको, उतना ही अच्छा।
‘‘प्रस्ताव कुछ इस आशय का होगा कि मद्रास की हिन्दू जनता मेरे कामों के प्रति अपना पूर्ण संतोष व्यक्त करती है।’’ (वही, पृष्ठ 342-43)
मद्रास
‘‘इस सभा को जितना बड़ा बना सकते हो, बनाओ। धर्म एवं देश के नाम पर सभी बड़े आदमियों को उसमें भाग लेने के लिए पकड़ो। मैसूर के महाराजा तथा दीवान से इस सभा और उसके उद्देश्यों का समर्थन करने वाला पत्र प्राप्त करने की चेष्टा करो। मतलब यह कि जितनी बड़ी सभा और उसका शोर उठा सको, उतना ही अच्छा।
‘‘प्रस्ताव कुछ इस आशय का होगा कि मद्रास की हिन्दू जनता मेरे कामों के प्रति अपना पूर्ण संतोष व्यक्त करती है।’’ (वही, पृष्ठ 342-43)
मद्रास