और कलकत्ता इत्यादि नगरों में विराट सभाएं हुई। इनमें न सिर्फ विवेकानन्द के काम को सराहा गया, बल्कि इस काम पर गर्व व्यक्त करते हुए उन्हें अभिनन्दित किया गया। इस सभाओं की कार्यवाही भारत तथा अमेरिका के अखबारों में छपी और इनमें पास किए गए प्रस्ताव उन लोगों को भेजे गए, जिनके नाम विवेकानन्द ने लिखे थे। इससे पादरीगणों का झूठ उजागर हो गया। लेकिन विवेकानन्द का उद्देश्य सिर्फ पादरियों का मंुह बन्द करना ही नहीं था, भारत की सोई हुई
और कलकत्ता इत्यादि नगरों में विराट सभाएं हुई। इनमें न सिर्फ विवेकानन्द के काम को सराहा गया, बल्कि इस काम पर गर्व व्यक्त करते हुए उन्हें अभिनन्दित किया गया। इस सभाओं की कार्यवाही भारत तथा अमेरिका के अखबारों में छपी और इनमें पास किए गए प्रस्ताव उन लोगों को भेजे गए, जिनके नाम विवेकानन्द ने लिखे थे। इससे पादरीगणों का झूठ उजागर हो गया। लेकिन विवेकानन्द का उद्देश्य सिर्फ पादरियों का मंुह बन्द करना ही नहीं था, भारत की सोई हुई