अथवा वे शब्द तुम लोगों के हृदय में किन-किन भावों का उद्रेक करेंगे, इसकी मैं परवाह नहीं करता। मुझे बहुत कम चिंता है, क्योंकि मैं वही सन्यासी हूं, जिसने लगभग चार वर्ष पहले अपने दंड और कमंडलु, के साथ तुम्हारे नगर में प्रवेश किया था और सारी दुनिया इस समय भी मेरे सामने पड़ी है।’’
देश-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी तत्वों के लिए जब सीधे तथा प्रत्यक्ष रूप से लड़ना सम्भव नहीं रहता तो वे मित्र का छद्म रूप धरकर हमारी पंक्तियों में घुस
अथवा वे शब्द तुम लोगों के हृदय में किन-किन भावों का उद्रेक करेंगे, इसकी मैं परवाह नहीं करता। मुझे बहुत कम चिंता है, क्योंकि मैं वही सन्यासी हूं, जिसने लगभग चार वर्ष पहले अपने दंड और कमंडलु, के साथ तुम्हारे नगर में प्रवेश किया था और सारी दुनिया इस समय भी मेरे सामने पड़ी है।’’
देश-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी तत्वों के लिए जब सीधे तथा प्रत्यक्ष रूप से लड़ना सम्भव नहीं रहता तो वे मित्र का छद्म रूप धरकर हमारी पंक्तियों में घुस