योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

मेरे चारों ओर कुछ ऐसी परिस्थितियां उपस्थिति हो रही है, जो मेरे कार्य की उन्नति में विशेष रूप से विघ्न डालने की चेष्टा कर रही हैं, यहां तक कि यदि सम्भव हो सके, तो वे मुझे एक बार ही कुचलकर मेरा अस्तित्व ही नष्ट कर डाले।...मैं गत तीन वर्षों से देख रहा हूं, कुछ लोग मेरे एवं मेरे कार्यों के संबंध में कुछ भ्रान्त धारणाएं बनाए हुए हैं। जब तक मैं विदेश में था, मैं चुप रहा, मैं स्पष्टीकरण के रूप् में कुछ शब्द कहना चाहता हूं। इन शब्दों का क्या फल होगा,


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मेरे चारों ओर कुछ ऐसी परिस्थितियां उपस्थिति हो रही है, जो मेरे कार्य की उन्नति में विशेष रूप से विघ्न डालने की चेष्टा कर रही हैं, यहां तक कि यदि सम्भव हो सके, तो वे मुझे एक बार ही कुचलकर मेरा अस्तित्व ही नष्ट कर डाले।...मैं गत तीन वर्षों से देख रहा हूं, कुछ लोग मेरे एवं मेरे कार्यों के संबंध में कुछ भ्रान्त धारणाएं बनाए हुए हैं। जब तक मैं विदेश में था, मैं चुप रहा, मैं स्पष्टीकरण के रूप् में कुछ शब्द कहना चाहता हूं। इन शब्दों का क्या फल होगा,


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