योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

‘‘आकार में दैत्य और बुद्वि में बालक के समान अमेरिकी जनता उसी सूझ में रूचि लेती है जो उसका कोई लाभ कर सके। तत्व मीमांसा और धर्म को बिगाड़कर झूठे वैज्ञानिक प्रयोगों का रूप दे दिया जाता है, उद्देश्य होता है सत्ता की, धन की, बल की, संसार-सुख की सिद्वि।’’1 विवेकानन्द से ये कब सहन होता था। उन्होंने लूट-खसोट तथा स्वार्थ से उत्पन्न इस प्रवृत्िा की सार्वजनिक रूप से निंदा की। पादरियों को विरोध का एक और अवसर मिला और उन्होंने आरोप


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‘‘आकार में दैत्य और बुद्वि में बालक के समान अमेरिकी जनता उसी सूझ में रूचि लेती है जो उसका कोई लाभ कर सके। तत्व मीमांसा और धर्म को बिगाड़कर झूठे वैज्ञानिक प्रयोगों का रूप दे दिया जाता है, उद्देश्य होता है सत्ता की, धन की, बल की, संसार-सुख की सिद्वि।’’1 विवेकानन्द से ये कब सहन होता था। उन्होंने लूट-खसोट तथा स्वार्थ से उत्पन्न इस प्रवृत्िा की सार्वजनिक रूप से निंदा की। पादरियों को विरोध का एक और अवसर मिला और उन्होंने आरोप


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