योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

सत्य वातावरण से जूझने के कार्यों मंे तात्कालिक उद्देश्य की प्राप्ति का साधन मात्र है, अर्थात् इस सिद्वान्त का सार तत्व यह है कि ‘सत्य उपयोगी होने के कारण ही सत्य है।’ साम्राज्य तथा व्यापार के विस्तार के लिए सरपट दौड़ रहे नई दुनिया के शासक वर्ग का यही सिद्वान्त था और अब भी है। इस शासक वर्ग द्वारा राजयोग भी शुद्व व्यावहारिक उपयोगिता की दृष्टि से भौतिक सामथ्र्य के साधन के रूप में

109 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

देखा गया।


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सत्य वातावरण से जूझने के कार्यों मंे तात्कालिक उद्देश्य की प्राप्ति का साधन मात्र है, अर्थात् इस सिद्वान्त का सार तत्व यह है कि ‘सत्य उपयोगी होने के कारण ही सत्य है।’ साम्राज्य तथा व्यापार के विस्तार के लिए सरपट दौड़ रहे नई दुनिया के शासक वर्ग का यही सिद्वान्त था और अब भी है। इस शासक वर्ग द्वारा राजयोग भी शुद्व व्यावहारिक उपयोगिता की दृष्टि से भौतिक सामथ्र्य के साधन के रूप में

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