के लिए विवेकानन्द ने अपने मस्तिष्क में जो कार्य-पद्वति स्थिर की थी, 17 फरवरी, 1896 को आलासिंगा पेरूमल के नाम पत्र में उसका उल्लेख इस प्रकार किया है:
‘‘हिन्दू भावों को अंगे्रज़ी में व्यक्त करना, फिर शुष्क दर्शन, पेचीदी पौराणिक कथाएं और अनूठे आश्चर्यजनक मनोविज्ञान से एक ऐसे धर्म का निर्माण करना, जो सरल, सहज और लोकप्रिय हो और उसके साथ ही उन्नत मस्तिष्क वालों को संतुष्ट कर सके, इस कार्य की कठिनाइयों को वही समझ सकते हैं,
के लिए विवेकानन्द ने अपने मस्तिष्क में जो कार्य-पद्वति स्थिर की थी, 17 फरवरी, 1896 को आलासिंगा पेरूमल के नाम पत्र में उसका उल्लेख इस प्रकार किया है:
‘‘हिन्दू भावों को अंगे्रज़ी में व्यक्त करना, फिर शुष्क दर्शन, पेचीदी पौराणिक कथाएं और अनूठे आश्चर्यजनक मनोविज्ञान से एक ऐसे धर्म का निर्माण करना, जो सरल, सहज और लोकप्रिय हो और उसके साथ ही उन्नत मस्तिष्क वालों को संतुष्ट कर सके, इस कार्य की कठिनाइयों को वही समझ सकते हैं,