हुई कुमारी मेरी हेल उसकी सजीव प्रतिमा थी। विवेकानन्द ने उसे बहन बनाकर हृदय का समस्त प्यार दिया। निवेदिता हमारे समूचे राष्ट्र की बहन है और उसकी पुण्य स्मृति पर स्नेह तथा कृतज्ञता के फूल चढ़ाते रहना हमारा राष्ट्रीय गौरव है।
विवेकानन्द ने अमेरिका और इंग्लैंड में चार बरस तक जो प्रचार कार्य किया, उससे उनके अपने व्यक्तित्व का जो निर्माण हुआ उस पर विचार कर लेना अत्यावश्यक है। पाश्चात्य श्रोताओं के सम्मुख अपने विचार व्यक्त करने
हुई कुमारी मेरी हेल उसकी सजीव प्रतिमा थी। विवेकानन्द ने उसे बहन बनाकर हृदय का समस्त प्यार दिया। निवेदिता हमारे समूचे राष्ट्र की बहन है और उसकी पुण्य स्मृति पर स्नेह तथा कृतज्ञता के फूल चढ़ाते रहना हमारा राष्ट्रीय गौरव है।
विवेकानन्द ने अमेरिका और इंग्लैंड में चार बरस तक जो प्रचार कार्य किया, उससे उनके अपने व्यक्तित्व का जो निर्माण हुआ उस पर विचार कर लेना अत्यावश्यक है। पाश्चात्य श्रोताओं के सम्मुख अपने विचार व्यक्त करने