योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



यह कार्य सहज नहीं था। इंग्लैंड और अमेरिका के सबुद्व श्रोताओं को अपनी बात समझाते-समझाते ज्ञान का विकास और खोल का विस्तार निरन्तर होता रहा,

111 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

होना स्वाभाविक ही था। आलासिंगा पेरूमल ही के नाम एक और पत्र में वे लिखते हैः

‘‘अब मैं तुम्हें अपने एक नूतन आविष्कार के विषय में बताऊंगा। समग्र-धर्म वेदान्त ही में है, अर्थात् वेदान्त दर्शन के द्वैत, विशिष्टाद्वैत और अद्वैत इन तीन स्तरों या भूमिकाओं


538 of 1197



यह कार्य सहज नहीं था। इंग्लैंड और अमेरिका के सबुद्व श्रोताओं को अपनी बात समझाते-समझाते ज्ञान का विकास और खोल का विस्तार निरन्तर होता रहा,

111 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

होना स्वाभाविक ही था। आलासिंगा पेरूमल ही के नाम एक और पत्र में वे लिखते हैः

‘‘अब मैं तुम्हें अपने एक नूतन आविष्कार के विषय में बताऊंगा। समग्र-धर्म वेदान्त ही में है, अर्थात् वेदान्त दर्शन के द्वैत, विशिष्टाद्वैत और अद्वैत इन तीन स्तरों या भूमिकाओं


538 of 1197