निहित रहता है। पर इस तत्व में होने वाले रूपान्तर वर्ग संबंधों में उद्भव होते हैं यानी जो लोग परिवर्तन लाते हैं,
115 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
उनके आर्थिक संबंध इसका कारण बनते हैं।’’ (लुडविग फ्यूरबाख, पृष्ठ 10-71)
उन्नीसवीं सदी के उत्तराद्र्व में हमारे देश में जो पूंजीपति वर्ग पैदा हुआ, वहीं सुधारवाद अथवा नवजागरण की मुख्य शक्ति था। वह विदेशी शासकों से राजनीतिक तथा आर्थिक क्षेत्र में लोहा लेने में अक्षम था। उसकी
निहित रहता है। पर इस तत्व में होने वाले रूपान्तर वर्ग संबंधों में उद्भव होते हैं यानी जो लोग परिवर्तन लाते हैं,
115 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
उनके आर्थिक संबंध इसका कारण बनते हैं।’’ (लुडविग फ्यूरबाख, पृष्ठ 10-71)
उन्नीसवीं सदी के उत्तराद्र्व में हमारे देश में जो पूंजीपति वर्ग पैदा हुआ, वहीं सुधारवाद अथवा नवजागरण की मुख्य शक्ति था। वह विदेशी शासकों से राजनीतिक तथा आर्थिक क्षेत्र में लोहा लेने में अक्षम था। उसकी