संस्कृति पर भी बाहर और भीतर से आक्रमण हो रहा था। सवाल यह था कि वह इस आक्रमण का मुकाबला कैसे करें? वह अपने पूर्वजों से विरासत में मिली सभ्यता को विदेशी शासकों की औद्योगिक सभ्यता से बेहतर बताएं तो कैसे बताएं? वह एक कठिन समस्या थी। देशभक्त बुर्जुवा ने इसका हल यह निकाला कि उसने अपनी सभ्यता को विशुद्व रूप से आध्यात्मिक बताया, भौतिक साधनों के पीछे दौड़ना उसका लक्ष्य न पहले कभी था और न आगे कभी होगा, त्याग और वैराग्य हमारा प्रधान
संस्कृति पर भी बाहर और भीतर से आक्रमण हो रहा था। सवाल यह था कि वह इस आक्रमण का मुकाबला कैसे करें? वह अपने पूर्वजों से विरासत में मिली सभ्यता को विदेशी शासकों की औद्योगिक सभ्यता से बेहतर बताएं तो कैसे बताएं? वह एक कठिन समस्या थी। देशभक्त बुर्जुवा ने इसका हल यह निकाला कि उसने अपनी सभ्यता को विशुद्व रूप से आध्यात्मिक बताया, भौतिक साधनों के पीछे दौड़ना उसका लक्ष्य न पहले कभी था और न आगे कभी होगा, त्याग और वैराग्य हमारा प्रधान