जाति के हित के लिए इस शक्ति के द्वारा क्या कार्य किए गए हैं, इसका पता लगाओ।
मैं तुमको विश्वास दिलाता हूं कि संसार के किसी भी देश में सार्वभौम धर्म और विभिन्न सम्प्रदायों में भ्रातृभाव के उत्थापित और पर्यालोचित होने के बहुत पहले ही, इस नगर के पास, एक ऐसे महापुरूष थे, जिनका सम्पूर्ण जीवन एक आदर्श धर्म-महासभा का स्वरूप था।’’ (वि.सा., पंचम खंड, पृष्ठ 208)
रामकृष्ण परमहंस के विश्व-धर्म और विश्व-बंधुत्व के सार्वभौम आदर्श की व्याख्या करते हुए उन्होंने आगे कहा:
जाति के हित के लिए इस शक्ति के द्वारा क्या कार्य किए गए हैं, इसका पता लगाओ।
मैं तुमको विश्वास दिलाता हूं कि संसार के किसी भी देश में सार्वभौम धर्म और विभिन्न सम्प्रदायों में भ्रातृभाव के उत्थापित और पर्यालोचित होने के बहुत पहले ही, इस नगर के पास, एक ऐसे महापुरूष थे, जिनका सम्पूर्ण जीवन एक आदर्श धर्म-महासभा का स्वरूप था।’’ (वि.सा., पंचम खंड, पृष्ठ 208)
रामकृष्ण परमहंस के विश्व-धर्म और विश्व-बंधुत्व के सार्वभौम आदर्श की व्याख्या करते हुए उन्होंने आगे कहा: