है कि इस महाशक्ति (रामकृष्ण) का आर्विभाव हुआ। मुझे इस बात की चिन्ता नहीं है कि तुम इस महापुरूष को किस अर्थ में ग्रहण करते हो और उसके प्रति कितना आदर करते हो, किन्तु मैं तुम्हें यह चुनौति के रूप् में अवश्य बता देना चाहता हूं कि अनेक शताब्दियों से भारत में विद्यमान अद्भुत शक्ति का यह प्रकट रूप है, और एक हिन्दू के नाते तुम्हारा यह कर्त्तव्य है कि तुम इस शक्ति का अध्ययन करो, तथा भारत के कल्याण, उसके पुनरूत्थान और समस्त मानव
है कि इस महाशक्ति (रामकृष्ण) का आर्विभाव हुआ। मुझे इस बात की चिन्ता नहीं है कि तुम इस महापुरूष को किस अर्थ में ग्रहण करते हो और उसके प्रति कितना आदर करते हो, किन्तु मैं तुम्हें यह चुनौति के रूप् में अवश्य बता देना चाहता हूं कि अनेक शताब्दियों से भारत में विद्यमान अद्भुत शक्ति का यह प्रकट रूप है, और एक हिन्दू के नाते तुम्हारा यह कर्त्तव्य है कि तुम इस शक्ति का अध्ययन करो, तथा भारत के कल्याण, उसके पुनरूत्थान और समस्त मानव