रूप में संगठित करेगी। तुम राजनीति में विशेष रूचि रखने वालों से मेरा प्रश्न है कि क्या इसके लिए तुम कोई प्रमाण चाहते हो? आज की इस सभी ही से मेरी बात का यथेष्ट प्रमाण मिल सकता है।’’ (वही, पृष्ठ 290)
पूंजीवाद स्वभावतः विस्तार चाहता है। हमारे उभरते हुए बुर्जुवा ने अपनी आध्यात्मिक शक्ति से संसार को जीतना अपना आदर्श घोषित किया। इससे एक तरफ उन्होंने साम्राज्यवादी अंध-राष्ट्रवाद के मुकाबले बुर्जुआ अंध-राष्ट्रवाद को प्रस्तुत
रूप में संगठित करेगी। तुम राजनीति में विशेष रूचि रखने वालों से मेरा प्रश्न है कि क्या इसके लिए तुम कोई प्रमाण चाहते हो? आज की इस सभी ही से मेरी बात का यथेष्ट प्रमाण मिल सकता है।’’ (वही, पृष्ठ 290)
पूंजीवाद स्वभावतः विस्तार चाहता है। हमारे उभरते हुए बुर्जुवा ने अपनी आध्यात्मिक शक्ति से संसार को जीतना अपना आदर्श घोषित किया। इससे एक तरफ उन्होंने साम्राज्यवादी अंध-राष्ट्रवाद के मुकाबले बुर्जुआ अंध-राष्ट्रवाद को प्रस्तुत