में मेरे एक बड़े मित्र डाक्टर बरोज द्वारा पेश किए गए दावे के विषय में सुना होगा कि ईसाई धर्म ही एक ऐसा धर्म है, जिसे सार्वजनिक कह सकते हैं, मैं अब इस प्रश्न
118 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
की मीमांसा करूंगा और तुम्हारे सम्मुख उन तर्कों को प्रस्तुत करूंगा, जिनके कारण मै। वेदान्त -सिर्फ वेदान्त ही को सार्वजनिक मानता हूं, और वेदान्त के सिवा कोई अन्य धर्म सार्वजनिक नहीं कहला सकता। हमारे वेदान्त धर्म के सिवा दुनिया के रंगमंच पर जितने भी अन्याय धर्म हैं,
में मेरे एक बड़े मित्र डाक्टर बरोज द्वारा पेश किए गए दावे के विषय में सुना होगा कि ईसाई धर्म ही एक ऐसा धर्म है, जिसे सार्वजनिक कह सकते हैं, मैं अब इस प्रश्न
118 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
की मीमांसा करूंगा और तुम्हारे सम्मुख उन तर्कों को प्रस्तुत करूंगा, जिनके कारण मै। वेदान्त -सिर्फ वेदान्त ही को सार्वजनिक मानता हूं, और वेदान्त के सिवा कोई अन्य धर्म सार्वजनिक नहीं कहला सकता। हमारे वेदान्त धर्म के सिवा दुनिया के रंगमंच पर जितने भी अन्याय धर्म हैं,