वे उनके संस्थापकों के जीवन के साथ सम्पूर्णतः संशिष्ट और सम्बद्व हैं। उनके सिद्वान्त, उनकी शिक्षाएं, उनके मत और उनका आचार-शास्त्र जो कुछ है, सब किसी-न-किसी धर्म-संस्थापक के जीवन के आधार पर ही खडे़ हैं और उसी से वे अपने आदर्श प्रमाण और शक्ति ग्रहण करते हैं। और आश्चर्य तो यह है कि उसी अधिष्ठाता विशेष के जीवन की ऐतिहासिकता ही पर उसकी सारी नींव प्रतिष्ठित है। यदि किसी तरह उसके जीवन की ऐतिहासिकता पर आघात लगे, जैसा कि वर्तमान
वे उनके संस्थापकों के जीवन के साथ सम्पूर्णतः संशिष्ट और सम्बद्व हैं। उनके सिद्वान्त, उनकी शिक्षाएं, उनके मत और उनका आचार-शास्त्र जो कुछ है, सब किसी-न-किसी धर्म-संस्थापक के जीवन के आधार पर ही खडे़ हैं और उसी से वे अपने आदर्श प्रमाण और शक्ति ग्रहण करते हैं। और आश्चर्य तो यह है कि उसी अधिष्ठाता विशेष के जीवन की ऐतिहासिकता ही पर उसकी सारी नींव प्रतिष्ठित है। यदि किसी तरह उसके जीवन की ऐतिहासिकता पर आघात लगे, जैसा कि वर्तमान