हमारा धर्म यहां तक कहता है कि वर्तमान तथा भविष्य में और भी बहुतेरे महापुरूष और अवतार आविर्भूत होंगे...हमारे देश में ‘इष्ट-निष्ठा’ रूपी जो अपूर्व सिद्वान्त प्रचलित है, जिसके अनुसार इन महान धार्मिक व्यक्तियों में से अपना इष्ट देवता चुनने की पूरी स्वाधीनता दी जाती है, तुम चाहे जिस अवतार या आचार्य को अपने जीवन का आदर्श बनाकर विशेष रूप से उपासना करना चाहो, कर सकते हो। यहां तक कि तुमको सोचने की भी स्वाधीनता है कि जिसको तुमने स्वीकार किया है,
हमारा धर्म यहां तक कहता है कि वर्तमान तथा भविष्य में और भी बहुतेरे महापुरूष और अवतार आविर्भूत होंगे...हमारे देश में ‘इष्ट-निष्ठा’ रूपी जो अपूर्व सिद्वान्त प्रचलित है, जिसके अनुसार इन महान धार्मिक व्यक्तियों में से अपना इष्ट देवता चुनने की पूरी स्वाधीनता दी जाती है, तुम चाहे जिस अवतार या आचार्य को अपने जीवन का आदर्श बनाकर विशेष रूप से उपासना करना चाहो, कर सकते हो। यहां तक कि तुमको सोचने की भी स्वाधीनता है कि जिसको तुमने स्वीकार किया है,