युग में प्रायः देखने में आता है कि बहुधा सभी धर्म संस्थापकों और अधिष्ठिाओं की जीवनी के आधे भाग पर भी संदिग्ध दृष्टि से देखा जाता है, और जब ऐसी स्थिति है कि तथाकथित ऐतिहासिकता की चट्टान हिल गई है और ध्वस्त हो रही है, तब सम्पूर्ण भवन अरराकर गिर पड़ता और सदा के लिए अपना महत्व खो देता है।’’
फिर अपना दावा पेश करते हुए उन्होंने कहा कि हमारा धर्म कुछ तत्वों की नींव पर खड़ा है, ‘‘हमारे धर्म में जितने अवतार, महापुरूष और ऋषि हैं और किसी धर्म में हैं? इतना ही नहीं,
युग में प्रायः देखने में आता है कि बहुधा सभी धर्म संस्थापकों और अधिष्ठिाओं की जीवनी के आधे भाग पर भी संदिग्ध दृष्टि से देखा जाता है, और जब ऐसी स्थिति है कि तथाकथित ऐतिहासिकता की चट्टान हिल गई है और ध्वस्त हो रही है, तब सम्पूर्ण भवन अरराकर गिर पड़ता और सदा के लिए अपना महत्व खो देता है।’’
फिर अपना दावा पेश करते हुए उन्होंने कहा कि हमारा धर्म कुछ तत्वों की नींव पर खड़ा है, ‘‘हमारे धर्म में जितने अवतार, महापुरूष और ऋषि हैं और किसी धर्म में हैं? इतना ही नहीं,