योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

को वेदान्त के विषय में ध्यान देने का दूसरा कारण यह है कि संसार के समस्त धर्म-ग्रंथों में एकमात्र वदोन्त ही ऐसा धर्म ग्रंथ है, जिसकी शिक्षाओं के साथ आह्म प्रकृति के वैज्ञानिक अनुसंधान से प्राप्त परिणामों का सम्पूर्ण सामंजस्य है।’’ (वही, पृष्ठ 79-81)

रामकृष्ण परमहंस के आदर्श ‘जितने मत उतने पथ’ का मतलब है कि सभी धर्म सत्य है और जो जिस धर्म को मानता है, उसके लिए वही ठीक है, यह धर्मों

119 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

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को वेदान्त के विषय में ध्यान देने का दूसरा कारण यह है कि संसार के समस्त धर्म-ग्रंथों में एकमात्र वदोन्त ही ऐसा धर्म ग्रंथ है, जिसकी शिक्षाओं के साथ आह्म प्रकृति के वैज्ञानिक अनुसंधान से प्राप्त परिणामों का सम्पूर्ण सामंजस्य है।’’ (वही, पृष्ठ 79-81)

रामकृष्ण परमहंस के आदर्श ‘जितने मत उतने पथ’ का मतलब है कि सभी धर्म सत्य है और जो जिस धर्म को मानता है, उसके लिए वही ठीक है, यह धर्मों

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