इसका अनुसंधान कोई नहीं करता, केवल दूसरों के इशारे पर वे हिन्दू धर्म को बदनाम करने का साहस करते हैं। एक दूसरा वर्ग और भी है, जो हिन्दू के प्रत्येक रीति-रिवाजों में वैज्ञानिकता ढूंढ़ निकालने का लचर प्रयत्न कर रहे हैं। वे सदा विद्युत शक्ति, चुम्बकीय शक्ति, वायु-कम्पन तथा उसी तरह की अन्य बातें किया करते हैं। कौन कह सकता है कि वे लोग एक
122 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
दिन ईश्वर की परिभाषा करने में उसे विद्युत-कम्पन का समूह न कह डालें।’’ (पंचम खंड, पृष्ठ 339-40)
इसका अनुसंधान कोई नहीं करता, केवल दूसरों के इशारे पर वे हिन्दू धर्म को बदनाम करने का साहस करते हैं। एक दूसरा वर्ग और भी है, जो हिन्दू के प्रत्येक रीति-रिवाजों में वैज्ञानिकता ढूंढ़ निकालने का लचर प्रयत्न कर रहे हैं। वे सदा विद्युत शक्ति, चुम्बकीय शक्ति, वायु-कम्पन तथा उसी तरह की अन्य बातें किया करते हैं। कौन कह सकता है कि वे लोग एक
122 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
दिन ईश्वर की परिभाषा करने में उसे विद्युत-कम्पन का समूह न कह डालें।’’ (पंचम खंड, पृष्ठ 339-40)