जो हिन्दू जाति के पुनरूत्ािान के लिए हमारे धर्म में सुधार या यों कहिए उलट-पलट करना चाहते हैं। निस्संदेह उन लोगों में कुछ विचारशील व्यक्ति हैं, लेकिन साथ ही ऐसे बहुत-से-लोग भी हैं जो अपने उद्देश्य को बिना जाने दूसरों का अंधानुकरण करते हैं। इस वर्ग के सुधारक हमारे धर्म में विजातीय विचारों का प्रवेश करने में बड़ा उत्साह दिखाते हैं। कहते हैं कि हिन्दू धर्म सच्चा धर्म नहीं है क्योंकि इसमें मूर्ति-पूजा का विधान है। मूर्ति-पूजा क्या है? यह अच्छी है या बुरी,
जो हिन्दू जाति के पुनरूत्ािान के लिए हमारे धर्म में सुधार या यों कहिए उलट-पलट करना चाहते हैं। निस्संदेह उन लोगों में कुछ विचारशील व्यक्ति हैं, लेकिन साथ ही ऐसे बहुत-से-लोग भी हैं जो अपने उद्देश्य को बिना जाने दूसरों का अंधानुकरण करते हैं। इस वर्ग के सुधारक हमारे धर्म में विजातीय विचारों का प्रवेश करने में बड़ा उत्साह दिखाते हैं। कहते हैं कि हिन्दू धर्म सच्चा धर्म नहीं है क्योंकि इसमें मूर्ति-पूजा का विधान है। मूर्ति-पूजा क्या है? यह अच्छी है या बुरी,