योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

अंग्रेज़ों के सम्मुख अपने को सुन्दर दिखाने ही में कोई कसर नहीं रखी। पर यह तो सुधार नहीं कहा जा सकता। सुधार करने में हमें चीज़ के भीतर उसकी जड़ तक पहुंचना होता है। आग जड़ में लगाओ और उसे क्रमशः ऊपर उठने दो एवं एक अखंड भारतीय राष्ट्र संगठित करो।’’ (वही, पृष्ठ 111)

एक अखंड भारतीय राष्ट्र संगठित करना ही समय का प्रधान कार्य था। इसी को उन्होंने अपना जीवन-व्रत बना लिया था और वे अपने जीवन-व्रत को राष्ट्र का हित चाहने वाले सभी देशवासियों


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अंग्रेज़ों के सम्मुख अपने को सुन्दर दिखाने ही में कोई कसर नहीं रखी। पर यह तो सुधार नहीं कहा जा सकता। सुधार करने में हमें चीज़ के भीतर उसकी जड़ तक पहुंचना होता है। आग जड़ में लगाओ और उसे क्रमशः ऊपर उठने दो एवं एक अखंड भारतीय राष्ट्र संगठित करो।’’ (वही, पृष्ठ 111)

एक अखंड भारतीय राष्ट्र संगठित करना ही समय का प्रधान कार्य था। इसी को उन्होंने अपना जीवन-व्रत बना लिया था और वे अपने जीवन-व्रत को राष्ट्र का हित चाहने वाले सभी देशवासियों


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