का जीवन-व्रत बना देना चाहते थे। अतएव ‘इंग्लैंड मंे भारतीय आध्यात्मिक विचारों का प्रभाव’ भाषण में हम उन्हें वज्र गम्भीर
123 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
स्वर में कहते हुए सुनते हैं:
‘‘अपने जीवन के महान व्रत को याद रखो। हम भारतवासियों और विशेषतः हम बंगाली बहुत परिमाण में विदेशी भावों से आक्रान्त हो रहे हैं, जो हमारे जातीय धर्म की सम्पूर्ण जीवनी शक्ति को चुका डालते हैं। हम आज इतने पिछड़े हुए क्यों हैं? क्यों हममें से
का जीवन-व्रत बना देना चाहते थे। अतएव ‘इंग्लैंड मंे भारतीय आध्यात्मिक विचारों का प्रभाव’ भाषण में हम उन्हें वज्र गम्भीर
123 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
स्वर में कहते हुए सुनते हैं:
‘‘अपने जीवन के महान व्रत को याद रखो। हम भारतवासियों और विशेषतः हम बंगाली बहुत परिमाण में विदेशी भावों से आक्रान्त हो रहे हैं, जो हमारे जातीय धर्म की सम्पूर्ण जीवनी शक्ति को चुका डालते हैं। हम आज इतने पिछड़े हुए क्यों हैं? क्यों हममें से