देशवासियों को हमारे पास आकर धर्म और अध्यात्म-विद्या की शिक्षा ग्रहण करनी होगी। हम हिन्दुओं को विश्वास करना होगा कि हम संसार के गुरू हैं। हम यहां पर राजनीतिक अधिकार तथा इसी प्रकार की अन्य बातों के लिए चिल्ला रहे हैं। अच्छी बात है, परन्तु अधिकार और सुभीते केवल मित्रता के द्वारा ही प्राप्त हो सकते हैं। यदि एक पक्ष वाला जीवन-भर भीख मांग रहे तो क्या यहां पर मित्रता स्ािापित हो सकती है? ये सब बातें कह देना बहुत आसान है, पर
देशवासियों को हमारे पास आकर धर्म और अध्यात्म-विद्या की शिक्षा ग्रहण करनी होगी। हम हिन्दुओं को विश्वास करना होगा कि हम संसार के गुरू हैं। हम यहां पर राजनीतिक अधिकार तथा इसी प्रकार की अन्य बातों के लिए चिल्ला रहे हैं। अच्छी बात है, परन्तु अधिकार और सुभीते केवल मित्रता के द्वारा ही प्राप्त हो सकते हैं। यदि एक पक्ष वाला जीवन-भर भीख मांग रहे तो क्या यहां पर मित्रता स्ािापित हो सकती है? ये सब बातें कह देना बहुत आसान है, पर