योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

कि इस धारणा का प्रयोजन अतीत और सांस्कृतिक परम्परा के प्रति घृणा फेलाना मात्र था। आर्य तो चूंकि कहीं नज़र नहीं आते इसलिए घृणा ब्राह्मणों और संस्कृत भाषा से की जाती है। इस घृणा को इतनी दूर तक फैलाया गया है कि शोषित और उत्पीड़ित शुद्र कही जाने वाली जातियांे की वर्तमान स्थिति के लिए नीतिकार मनु को जिम्मेदार ठहराया जाता है और प्रतिशोध के रूप में मनु स्मृति की प्रतियां जलाई जाती है। पर क्या प्रतियां जलाने से उनकी स्थिति में कोई


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कि इस धारणा का प्रयोजन अतीत और सांस्कृतिक परम्परा के प्रति घृणा फेलाना मात्र था। आर्य तो चूंकि कहीं नज़र नहीं आते इसलिए घृणा ब्राह्मणों और संस्कृत भाषा से की जाती है। इस घृणा को इतनी दूर तक फैलाया गया है कि शोषित और उत्पीड़ित शुद्र कही जाने वाली जातियांे की वर्तमान स्थिति के लिए नीतिकार मनु को जिम्मेदार ठहराया जाता है और प्रतिशोध के रूप में मनु स्मृति की प्रतियां जलाई जाती है। पर क्या प्रतियां जलाने से उनकी स्थिति में कोई


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