भारत और दक्षिणी भारत के लोगों को चुनकर अलग कर दें।’’
ठसी तरह अगर उत्तर भारत के हिन्दू, सिख, मुसलमान और ईसाई अथवा ब्राह्मण, क्षत्रिय और अन्य निम्न जातियों के लोग किसी एक सभा अथवा मेले-ठेले में एकत्रित हों, तो आर्यों तथा कालीआंखों वाले आदिवासियों को चुनकर अलग-अलग करना सम्भव नहीं है। और फिर हूण, कुशान, तातर और यूनानी इत्यादि जातियां आई और आकर आपस में खलत-मलत हो गई। उन्हें भी अलग-अलग पहचानना सम्भव नहीं है। तो सिद्व हुआ
भारत और दक्षिणी भारत के लोगों को चुनकर अलग कर दें।’’
ठसी तरह अगर उत्तर भारत के हिन्दू, सिख, मुसलमान और ईसाई अथवा ब्राह्मण, क्षत्रिय और अन्य निम्न जातियों के लोग किसी एक सभा अथवा मेले-ठेले में एकत्रित हों, तो आर्यों तथा कालीआंखों वाले आदिवासियों को चुनकर अलग-अलग करना सम्भव नहीं है। और फिर हूण, कुशान, तातर और यूनानी इत्यादि जातियां आई और आकर आपस में खलत-मलत हो गई। उन्हें भी अलग-अलग पहचानना सम्भव नहीं है। तो सिद्व हुआ