उन सबका राष्ट्र एक है, संस्कृति एक है और उन सबको एक ही महान अतीत से प्रेरणा लेनी है। सामयिक संस्कृति का सिद्वान्त मिथ्या तथा निराधार है और विदेशी शासकों द्वारा फूट बढ़ाने के लिए गढ़ा गया था। विवेकानन्द ‘भारत का भविष्य भाषण’ में कहते हैं:
‘‘यहां आर्य हैं, द्रविण हैं, तातार हैं, तुर्क हैं, मुगल हैं, यूरोपीय है मानो संसार की सभी जातियां इस भूमि में अपना-अपना खून मिला रही है। भाषा का यहां एक विचित्र ढंग का जमाव पड़ा है, आचार-व्यवहारों
उन सबका राष्ट्र एक है, संस्कृति एक है और उन सबको एक ही महान अतीत से प्रेरणा लेनी है। सामयिक संस्कृति का सिद्वान्त मिथ्या तथा निराधार है और विदेशी शासकों द्वारा फूट बढ़ाने के लिए गढ़ा गया था। विवेकानन्द ‘भारत का भविष्य भाषण’ में कहते हैं:
‘‘यहां आर्य हैं, द्रविण हैं, तातार हैं, तुर्क हैं, मुगल हैं, यूरोपीय है मानो संसार की सभी जातियां इस भूमि में अपना-अपना खून मिला रही है। भाषा का यहां एक विचित्र ढंग का जमाव पड़ा है, आचार-व्यवहारों