परन्तु साथ ही कुछ और भी जरूरी है-उसको संस्कृति का बोध दो।...जातियों में समता लाने के लिए एकमात्र उपाय उस संस्कार और शिक्षा का अर्जन करना है, जो उच्च वर्णों का बल और गौरव है। यदि यह तुम कर सको तो जो कुछ तुम चाहते हो, वह तुम्हें मिल जाएगा।’’ (पंचम खंड, पृष्ठ 158)
धर्म बदल लेने मात्र से न राष्ट्र बदल जाता है और न संस्कृति। विदेशी वह है, जिसका आर्थिक और मानसिक संबंध विदेश से जुड़ा रहे। हमारे देश में जितने भी सम्प्रदायों तथा जातियों के लोग हैं,
परन्तु साथ ही कुछ और भी जरूरी है-उसको संस्कृति का बोध दो।...जातियों में समता लाने के लिए एकमात्र उपाय उस संस्कार और शिक्षा का अर्जन करना है, जो उच्च वर्णों का बल और गौरव है। यदि यह तुम कर सको तो जो कुछ तुम चाहते हो, वह तुम्हें मिल जाएगा।’’ (पंचम खंड, पृष्ठ 158)
धर्म बदल लेने मात्र से न राष्ट्र बदल जाता है और न संस्कृति। विदेशी वह है, जिसका आर्थिक और मानसिक संबंध विदेश से जुड़ा रहे। हमारे देश में जितने भी सम्प्रदायों तथा जातियों के लोग हैं,