एकता ही की आवश्यकता है। देश-भर में एक ही धर्म सबको स्वीकार करना होगा। एक ही धर्म से मेरा क्या मतलब है? यह उस तरह का एक ही धर्म नहीं, जिसका ईसाइयों, मुसलमानों या बौद्वों में प्रचार है। हम जानते हैं, हमारे विभिन्न सम्प्रदायों के सिद्वान्त तथा दावे कितने ही विभिन्न क्यों न हों, हमारे धर्म में अद्भुत विविधिता के लिए गुंजाइश हो जाती है, और साथ ही विचार और अपनी रूचि अनुसार जीवन निर्वाह के लिए हमें सम्पूर्ण स्वाधीनता प्राप्त हो जाती है। हम लोग,
एकता ही की आवश्यकता है। देश-भर में एक ही धर्म सबको स्वीकार करना होगा। एक ही धर्म से मेरा क्या मतलब है? यह उस तरह का एक ही धर्म नहीं, जिसका ईसाइयों, मुसलमानों या बौद्वों में प्रचार है। हम जानते हैं, हमारे विभिन्न सम्प्रदायों के सिद्वान्त तथा दावे कितने ही विभिन्न क्यों न हों, हमारे धर्म में अद्भुत विविधिता के लिए गुंजाइश हो जाती है, और साथ ही विचार और अपनी रूचि अनुसार जीवन निर्वाह के लिए हमें सम्पूर्ण स्वाधीनता प्राप्त हो जाती है। हम लोग,