कम से कम वे जिन्होंने इस पर विचार किया है, यह बात जानते हैं। और अपने कर्म के ये जीवनप्रद सामान्य तत्व सबके सामने लाएं और देश के सभी स्त्री-पुरूष बाल-वृंद, उन्हें जानें-समझें तथा उन्हें जीवन में उतारें-यही हमारे लिए आवश्यक है। सर्वप्रथम यही हमारा कार्य है।’’ (वही, पृष्ठ 180-81)
‘‘धर्म’ शब्द यहां व्यापक अर्थ में प्रयोग हुआ है। पूरा समाज, उसके रीति-रिवाज, संस्कृति और परम्परा इसकी परिधि में आ जाती हैं। वेदान्त दर्शन के जिस सिद्वान्त का यहां उल्लेख हुआ है,
कम से कम वे जिन्होंने इस पर विचार किया है, यह बात जानते हैं। और अपने कर्म के ये जीवनप्रद सामान्य तत्व सबके सामने लाएं और देश के सभी स्त्री-पुरूष बाल-वृंद, उन्हें जानें-समझें तथा उन्हें जीवन में उतारें-यही हमारे लिए आवश्यक है। सर्वप्रथम यही हमारा कार्य है।’’ (वही, पृष्ठ 180-81)
‘‘धर्म’ शब्द यहां व्यापक अर्थ में प्रयोग हुआ है। पूरा समाज, उसके रीति-रिवाज, संस्कृति और परम्परा इसकी परिधि में आ जाती हैं। वेदान्त दर्शन के जिस सिद्वान्त का यहां उल्लेख हुआ है,