पे्रषण और मंथन के लिए उकसाया । इसी कारण उन्होंने कर्मकाण्ड को व्यवस्थित
133 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
किया, उसमें परिवर्तन और पुनः परिवर्तन किया, उसके विषय में शंकाए उठाई, उसका खंडन किया और उसकी समुचित व्याख्या की। देवी-देवताओं के बारे में गहरी छान-बीन हुई और उन्होंने सार्वभौम, सर्वव्यापक, सर्वान्तर्यामी सृष्टिकर्ता को, अपने पैतृक स्वर्गस्थ परमपिता को, केवल एक गौण स्थान प्रदान किया, या ‘उसे’ व्यर्थ कहकर पूर्णरूपेण
पे्रषण और मंथन के लिए उकसाया । इसी कारण उन्होंने कर्मकाण्ड को व्यवस्थित
133 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
किया, उसमें परिवर्तन और पुनः परिवर्तन किया, उसके विषय में शंकाए उठाई, उसका खंडन किया और उसकी समुचित व्याख्या की। देवी-देवताओं के बारे में गहरी छान-बीन हुई और उन्होंने सार्वभौम, सर्वव्यापक, सर्वान्तर्यामी सृष्टिकर्ता को, अपने पैतृक स्वर्गस्थ परमपिता को, केवल एक गौण स्थान प्रदान किया, या ‘उसे’ व्यर्थ कहकर पूर्णरूपेण