‘‘आरम्भ में इस जाति में एक अपूर्व जिज्ञासा थी जिसका शीर्घ ही निर्भीक विश्लेषण में विकास हो गया। यद्यपि आरम्भिक प्रयासों का परिणाम एक धुरंधर शिल्पी के अनाभ्यस्त हाथों के प्रयास जैसा भले ही हो, किन्तु शीघ्र ही उसका स्थान विशिष्ट विज्ञान, निर्भीक प्रयत्नों आश्चर्यजनक परिणामों ने ले लिया।’’
‘‘इस निर्भीकता ने आर्य ऋषियों को स्वनिर्मित यज्ञ कुंडों की हर एक ईंट के परीक्षण के लिए प्रेरित किया, उन्हें अपने धर्म-ग्रंथ के शब्द-शब्द के विश्लेषण,
‘‘आरम्भ में इस जाति में एक अपूर्व जिज्ञासा थी जिसका शीर्घ ही निर्भीक विश्लेषण में विकास हो गया। यद्यपि आरम्भिक प्रयासों का परिणाम एक धुरंधर शिल्पी के अनाभ्यस्त हाथों के प्रयास जैसा भले ही हो, किन्तु शीघ्र ही उसका स्थान विशिष्ट विज्ञान, निर्भीक प्रयत्नों आश्चर्यजनक परिणामों ने ले लिया।’’
‘‘इस निर्भीकता ने आर्य ऋषियों को स्वनिर्मित यज्ञ कुंडों की हर एक ईंट के परीक्षण के लिए प्रेरित किया, उन्हें अपने धर्म-ग्रंथ के शब्द-शब्द के विश्लेषण,