के अतिरिक्त कहीं अन्यत्र से उद्वरण कभी नहीं दिए, उपनिषदों से भी केवल ‘बल’ का आदर्श। वेद एवं वेदान्त का समस्त सार तथा अन्य सब कुछ एक इस शब्द में निहित है। बल और अभय। मेरा आदर्श तो वह सन्त है जो विद्रोह में मारा गया था और जब उसके हृदय में ‘छुरा भोंका गया, तब उसने केवल यह कहने के लिए अपना मौन भंग किया’, और तू भी ‘वही’ है।
‘‘किन्तु तुम पूछ सकते हो कि इस योजना में रामकृष्ण का क्या स्थान है?’’
‘‘वे तो स्वयं प्रणाली हैं,
के अतिरिक्त कहीं अन्यत्र से उद्वरण कभी नहीं दिए, उपनिषदों से भी केवल ‘बल’ का आदर्श। वेद एवं वेदान्त का समस्त सार तथा अन्य सब कुछ एक इस शब्द में निहित है। बल और अभय। मेरा आदर्श तो वह सन्त है जो विद्रोह में मारा गया था और जब उसके हृदय में ‘छुरा भोंका गया, तब उसने केवल यह कहने के लिए अपना मौन भंग किया’, और तू भी ‘वही’ है।
‘‘किन्तु तुम पूछ सकते हो कि इस योजना में रामकृष्ण का क्या स्थान है?’’
‘‘वे तो स्वयं प्रणाली हैं,