योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

क्रम विकास का सिद्वान्त जोड़ा और बड़े गर्व के साथ अपने इस आविष्कार की घोषणा की कि द्वैत, विशिष्टाद्वैत और अद्वैत धर्म के क्रमशः सोपान हैं। द्वैत निम्नतम और अद्वैत उच्चतम सोपान हैं।

यह घोषणा करने में वे अपने गुरू रामकृष्ण परमहंस से बहुत आगे जाते हैं। यह बताते हुए कि नये उत्थान को भीतर ही से विकसित होना चाहिए, उन्होंने अपने एक शिष्य से कहा था:

‘‘इसलिए मैं केवल उपनिषदों की शिक्षा देता हूं। तुम देख सकते हो कि मैंने उपनिषदों


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क्रम विकास का सिद्वान्त जोड़ा और बड़े गर्व के साथ अपने इस आविष्कार की घोषणा की कि द्वैत, विशिष्टाद्वैत और अद्वैत धर्म के क्रमशः सोपान हैं। द्वैत निम्नतम और अद्वैत उच्चतम सोपान हैं।

यह घोषणा करने में वे अपने गुरू रामकृष्ण परमहंस से बहुत आगे जाते हैं। यह बताते हुए कि नये उत्थान को भीतर ही से विकसित होना चाहिए, उन्होंने अपने एक शिष्य से कहा था:

‘‘इसलिए मैं केवल उपनिषदों की शिक्षा देता हूं। तुम देख सकते हो कि मैंने उपनिषदों


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