हीन बुद्वि और कपट देश पर छा गया है। क्या बुद्विमान लोग यह देखकर स्थिर रह सकते हैं? रोना नहीं आता ! मद्रास, बम्बई, पंजाब, बंगाल-कहीं भी तो जीवनी-शक्ति का चिहृ दिखाई नहीं देता। तुम लोग सोच रहे हो-‘हम शिक्षित हैं।’ क्या खाक सीखी है? दूसरों की बातों को दूसरी भाषा मंे रटकर, मस्तिष्क में भरकर, परीक्षा में उत्तीर्ण होकर सोच रहे हो-हम शिक्षित हो गए। धिक्-धिक्, इसका नाम कहीं शिक्षा है? तुम्हारी शिक्षा का उद्देश्य क्या है? या तो क्लर्क बनना,
हीन बुद्वि और कपट देश पर छा गया है। क्या बुद्विमान लोग यह देखकर स्थिर रह सकते हैं? रोना नहीं आता ! मद्रास, बम्बई, पंजाब, बंगाल-कहीं भी तो जीवनी-शक्ति का चिहृ दिखाई नहीं देता। तुम लोग सोच रहे हो-‘हम शिक्षित हैं।’ क्या खाक सीखी है? दूसरों की बातों को दूसरी भाषा मंे रटकर, मस्तिष्क में भरकर, परीक्षा में उत्तीर्ण होकर सोच रहे हो-हम शिक्षित हो गए। धिक्-धिक्, इसका नाम कहीं शिक्षा है? तुम्हारी शिक्षा का उद्देश्य क्या है? या तो क्लर्क बनना,