हो-अमृत के अधिकारी हो।’ इसी प्रकार हपले रजः शक्ति का उद्दीपन कर जीवन-संग्राम के लिए सबको कार्यक्षम बना, इसके पश्चात् उन्हें परजन्म में मुक्ति प्राप्त करने की बात सुना। पहले
141 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
भीतर की शक्ति को जाग्रत करके देश के लोगों को अपने पैरों पर खड़ा कर, अच्छे भोजन-वस्तु तथा उत्तम भोग आदि करना वे पहले सीखें। इसके बाद उन्हें उपाय बता दें कि किस प्रकार सब प्रकार के भोग-बंधनों से वे मुक्त हो सकेंगे। निष्क्रियता,
हो-अमृत के अधिकारी हो।’ इसी प्रकार हपले रजः शक्ति का उद्दीपन कर जीवन-संग्राम के लिए सबको कार्यक्षम बना, इसके पश्चात् उन्हें परजन्म में मुक्ति प्राप्त करने की बात सुना। पहले
141 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
भीतर की शक्ति को जाग्रत करके देश के लोगों को अपने पैरों पर खड़ा कर, अच्छे भोजन-वस्तु तथा उत्तम भोग आदि करना वे पहले सीखें। इसके बाद उन्हें उपाय बता दें कि किस प्रकार सब प्रकार के भोग-बंधनों से वे मुक्त हो सकेंगे। निष्क्रियता,