की सहायता से नित्य नवीन उपाय का आविष्कार करके! इसी अन्न-वस्त्र की व्यवस्था करने के लिए मैं लोगों को रजोगुण की वृद्वि करने का उपदेश देता हूं। अन्न-वस्त्र की कमी और उसकी चिन्ता से देश बुरी अवस्था मंे चला आ रहा है-इसके लिए तुम लोग क्या कर रहे हो? फेंक दो अपने शास्त्र-वास्त्र गंगाजी में। देश के लोगों को पहले अन्न की व्यवस्था करने का उपाय सिखा दे। इसके बाद उन्हें भगवान का पाठ सुनाना। कर्म तत्परता के द्वारा इहलोक का अभाव दूर
की सहायता से नित्य नवीन उपाय का आविष्कार करके! इसी अन्न-वस्त्र की व्यवस्था करने के लिए मैं लोगों को रजोगुण की वृद्वि करने का उपदेश देता हूं। अन्न-वस्त्र की कमी और उसकी चिन्ता से देश बुरी अवस्था मंे चला आ रहा है-इसके लिए तुम लोग क्या कर रहे हो? फेंक दो अपने शास्त्र-वास्त्र गंगाजी में। देश के लोगों को पहले अन्न की व्यवस्था करने का उपाय सिखा दे। इसके बाद उन्हें भगवान का पाठ सुनाना। कर्म तत्परता के द्वारा इहलोक का अभाव दूर