योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

उसे हम विचार कहते हैं।’’ (अष्टम खंड, पृष्ठ 121)

द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद के अनुसार मन अथवा मस्तिष्क पदार्थ ही का सुव्यवस्थित रूप है और हमारे समस्त विचार भौतिक परिस्थितियों ही से उत्पन्न होते हैं। उनके उत्पन्न होने की जो प्रक्रिया है, उसकी व्याख्या माओत्से तुंग ने ‘सही विचार कहां से आते हैं?’ लेख में इस प्रकार की है:

‘‘वे सामाजिक व्यवहार से, और केवल सामाजिक व्यवहार से पैदा होते हैं, वे तीन प्रकार के सामाजिक व्यवहार से पैदा होते हैं- उत्पादन संघर्ष,


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उसे हम विचार कहते हैं।’’ (अष्टम खंड, पृष्ठ 121)

द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद के अनुसार मन अथवा मस्तिष्क पदार्थ ही का सुव्यवस्थित रूप है और हमारे समस्त विचार भौतिक परिस्थितियों ही से उत्पन्न होते हैं। उनके उत्पन्न होने की जो प्रक्रिया है, उसकी व्याख्या माओत्से तुंग ने ‘सही विचार कहां से आते हैं?’ लेख में इस प्रकार की है:

‘‘वे सामाजिक व्यवहार से, और केवल सामाजिक व्यवहार से पैदा होते हैं, वे तीन प्रकार के सामाजिक व्यवहार से पैदा होते हैं- उत्पादन संघर्ष,


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