वर्ग संघर्ष और वैज्ञानिक अनुसंधान से पैदा होते हैं। मनुष्य का सामाजिक अस्तित्व ही उसके विचारों का निर्णय करता है। जहां एक बार जनता ने आगे बढ़े हुए वर्ग के सही विचारों को आत्मसात कर लिया तो ये विचार एक ऐसी भौतिक शक्ति में बदल जाते हैं, जो समाज को और दुनिया को बदल डालती है। अपने सामाजिक व्यवहार में मनुष्य विभिन्न प्रकार के संघर्षों में लगा रहता है और अपनी सफलताओं तथा असफलताओं से समृद्व अनुभव प्राप्त करता है। मनुष्य की पांच ज्ञानेन्द्रियों-आंख,
वर्ग संघर्ष और वैज्ञानिक अनुसंधान से पैदा होते हैं। मनुष्य का सामाजिक अस्तित्व ही उसके विचारों का निर्णय करता है। जहां एक बार जनता ने आगे बढ़े हुए वर्ग के सही विचारों को आत्मसात कर लिया तो ये विचार एक ऐसी भौतिक शक्ति में बदल जाते हैं, जो समाज को और दुनिया को बदल डालती है। अपने सामाजिक व्यवहार में मनुष्य विभिन्न प्रकार के संघर्षों में लगा रहता है और अपनी सफलताओं तथा असफलताओं से समृद्व अनुभव प्राप्त करता है। मनुष्य की पांच ज्ञानेन्द्रियों-आंख,