(चोरी, बेईमानी) को अशुभ बताकर, उन्हें नरक के भय से डराया।
पुनर्जन्म का सिद्वान्त भी ऐसी ही कल्पना है। पर वेदान्त का आधार स्तम्भ होने के कारण विवेकानन्द उसे यों अस्वीकारते नहीं, फिर भी चिंतन वैज्ञानिक होने के कारण उनका विश्वास यहां भी डगमगा जाता है। पुनर्जन्म के पक्ष और विपक्ष में दिए जाने वाले मतों का विवेचन करने के बाद इसी शीर्षक के अपने एक लेख के अन्त में वे यों कहते है:
‘‘इस प्रकार हमारे लिए पुनर्जन्म का सिद्वान्त बहुत महत्वपूर्ण बन जाता है,
(चोरी, बेईमानी) को अशुभ बताकर, उन्हें नरक के भय से डराया।
पुनर्जन्म का सिद्वान्त भी ऐसी ही कल्पना है। पर वेदान्त का आधार स्तम्भ होने के कारण विवेकानन्द उसे यों अस्वीकारते नहीं, फिर भी चिंतन वैज्ञानिक होने के कारण उनका विश्वास यहां भी डगमगा जाता है। पुनर्जन्म के पक्ष और विपक्ष में दिए जाने वाले मतों का विवेचन करने के बाद इसी शीर्षक के अपने एक लेख के अन्त में वे यों कहते है:
‘‘इस प्रकार हमारे लिए पुनर्जन्म का सिद्वान्त बहुत महत्वपूर्ण बन जाता है,