योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

के कल्याण की ओर लोगों का ध्यान जाता है। स्वजाति के स्वार्थ में अपना स्वार्थ है, और स्वजाति के हित में अपना हित। बहुत से काम कुछ लोगों की सहायता के बिना किसी प्रकार नहीं चल सकते, आत्म-रक्षा तक नहीं हो सकती। स्वार्थ-रक्षा के लिए यह सहकारिता सब देशों और जातियों में पाई जाती है। पर इस स्वार्थ की सीमा में हेर-फेर है...’’

166 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

‘‘भारत की वर्तमान प्रणाली में कई दोष हैं, पर साथ ही कई बड़े गुण भी हैं।


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के कल्याण की ओर लोगों का ध्यान जाता है। स्वजाति के स्वार्थ में अपना स्वार्थ है, और स्वजाति के हित में अपना हित। बहुत से काम कुछ लोगों की सहायता के बिना किसी प्रकार नहीं चल सकते, आत्म-रक्षा तक नहीं हो सकती। स्वार्थ-रक्षा के लिए यह सहकारिता सब देशों और जातियों में पाई जाती है। पर इस स्वार्थ की सीमा में हेर-फेर है...’’

166 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

‘‘भारत की वर्तमान प्रणाली में कई दोष हैं, पर साथ ही कई बड़े गुण भी हैं।


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