योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



(पृष्ठ, 222-23)

विदेशी साम्राज्यवादी शासन के गुण-दोषों का कितना सम्यक् तथा सुन्दर विवेचन है। यह विवेचन वेदान्त दर्शन द्वारा नहीं ऐतिहासिक भौतिकवाद द्वारा ही सम्भव है। रामकृष्ण परमहंस ने जिन अंगे्रज़ शासकों को सिर्फ गोरी जाति के रूप में देखा था, विवेकानन्द ने इंग्लैंड में रहकर उनके साम्राज्यवादी चरित्र को और भारत में उनकी भूमिका को भली-भांति समझ लिया था। और लिखा है:

‘‘परन्तु अंग्रेज़ों के मन मंे यह धारणा होने लगी है


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(पृष्ठ, 222-23)

विदेशी साम्राज्यवादी शासन के गुण-दोषों का कितना सम्यक् तथा सुन्दर विवेचन है। यह विवेचन वेदान्त दर्शन द्वारा नहीं ऐतिहासिक भौतिकवाद द्वारा ही सम्भव है। रामकृष्ण परमहंस ने जिन अंगे्रज़ शासकों को सिर्फ गोरी जाति के रूप में देखा था, विवेकानन्द ने इंग्लैंड में रहकर उनके साम्राज्यवादी चरित्र को और भारत में उनकी भूमिका को भली-भांति समझ लिया था। और लिखा है:

‘‘परन्तु अंग्रेज़ों के मन मंे यह धारणा होने लगी है


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