तो वह शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत बदल चुका था। मित्र उसे अपने बीच पाकर बहुत प्रसन्न हुए। वह स्कूल में दाखिल हुआ और नवीं और दसवीं कक्षा की तैयारी एक साल में की। लेकिन स्कूल में सिर्फ वही एक विद्यार्थी था, जिसने मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की। इससे न सिर्फ सगे संबंधियों बल्कि स्कूल के अधिकारियों को भी बड़ी खुशी हुई।
नरेन्द्र शरीर से हष्ट-पुष्ट था और सोलह बरस की आयु में बीस बरस का जान पड़ता था। कारण यह कि वह
तो वह शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत बदल चुका था। मित्र उसे अपने बीच पाकर बहुत प्रसन्न हुए। वह स्कूल में दाखिल हुआ और नवीं और दसवीं कक्षा की तैयारी एक साल में की। लेकिन स्कूल में सिर्फ वही एक विद्यार्थी था, जिसने मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की। इससे न सिर्फ सगे संबंधियों बल्कि स्कूल के अधिकारियों को भी बड़ी खुशी हुई।
नरेन्द्र शरीर से हष्ट-पुष्ट था और सोलह बरस की आयु में बीस बरस का जान पड़ता था। कारण यह कि वह